नया सफरनामा (نیا سفرنامہ )
Monday, 29 April 2019
Monday, 14 August 2017
अमित शाह को एक चिट्ठी
शाह जी नमस्ते
मैं एक अदना आम आदमी
अदना इंसान
आपके पेशे खिदमत में
शाह की शान में नज़्म अर्ज़ करता हूँ
काफी मशहूर "शाह"रुख़ खान ने कहा
बड़े बड़े देशों में छोटी छोटी बातें होती रहती है
शायद "शाह"रुख़ से प्रभावित हो कर
शाह साहब आपने कहा
इतना बड़ा देश है तो घटनाएं होती रहती है
बिलकुल सही फ़रमाया शाह साहब
इतना बड़ा देश
3500 साल पुरानी संस्कृति
क्या हुआ अगर अदना से घर में पैदा हुए
अदना इंसान के
30 बच्चे मर ही गए तो
भाई कुछ भी हो जाए
बड़ा देश है तो बड़ी कुर्बानी भी मांगेगा
बिलकुल मैं सहमत हूँ
आपकी बातों से
मरने दो बच्चों को
हमें तो आजादी के 70 साल का जश्न मानना है
मरने दो बच्चों को
हमें "न्यू इंडिया मूवमेंट " चलाना है '
मरने दो बच्चों को
हमें तो गाँधी मुद्रा में चरखा चलाना है
मरने दो बच्चों को
हमें तो सिर्फ जिओ का फ्री डाटा दे हिन्दुस्तान को डिजिटल बनाना है
लेकिन गुस्ताखी माफ़ शाह साहब
ये बच्चे कोई मामूली बच्चे नहीं थे
ये देश के भविष्य थे
इसी भारत माँ के सपूत थे
और मुझे नहीं लगता कि भारत माँ भी अपने बेटे
देख कर चुन कर बनाती है
ये बच्चे कोई मामूली बच्चे नहीं थे
कोई मामूली बच्चा नहीं मरा है
मरा है एक कलाम
मरा है एक भगत
मरा है एक जवाहर
मरा है एक अशफाक
मरा है एक भारत माँ का बेटा
मुझे माफ़ करना शाह साहब
हो सकता है भावनाओं में
आपकी शान में तौहीन की हो
लेकिन शाह साहब
मैं एक अदना आम आदमी
अदना इंसान
आपके पेशे खिदमत में
शाह की शान में नज़्म अर्ज़ करता हूँ
नमस्कार
मैं एक अदना आम आदमी
अदना इंसान
आपके पेशे खिदमत में
शाह की शान में नज़्म अर्ज़ करता हूँ
काफी मशहूर "शाह"रुख़ खान ने कहा
बड़े बड़े देशों में छोटी छोटी बातें होती रहती है
शायद "शाह"रुख़ से प्रभावित हो कर
शाह साहब आपने कहा
इतना बड़ा देश है तो घटनाएं होती रहती है
बिलकुल सही फ़रमाया शाह साहब
इतना बड़ा देश
3500 साल पुरानी संस्कृति
क्या हुआ अगर अदना से घर में पैदा हुए
अदना इंसान के
30 बच्चे मर ही गए तो
भाई कुछ भी हो जाए
बड़ा देश है तो बड़ी कुर्बानी भी मांगेगा
बिलकुल मैं सहमत हूँ
आपकी बातों से
मरने दो बच्चों को
हमें तो आजादी के 70 साल का जश्न मानना है
मरने दो बच्चों को
हमें "न्यू इंडिया मूवमेंट " चलाना है '
मरने दो बच्चों को
हमें तो गाँधी मुद्रा में चरखा चलाना है
मरने दो बच्चों को
हमें तो सिर्फ जिओ का फ्री डाटा दे हिन्दुस्तान को डिजिटल बनाना है
लेकिन गुस्ताखी माफ़ शाह साहब
ये बच्चे कोई मामूली बच्चे नहीं थे
ये देश के भविष्य थे
इसी भारत माँ के सपूत थे
और मुझे नहीं लगता कि भारत माँ भी अपने बेटे
देख कर चुन कर बनाती है
ये बच्चे कोई मामूली बच्चे नहीं थे
कोई मामूली बच्चा नहीं मरा है
मरा है एक कलाम
मरा है एक भगत
मरा है एक जवाहर
मरा है एक अशफाक
मरा है एक भारत माँ का बेटा
मुझे माफ़ करना शाह साहब
हो सकता है भावनाओं में
आपकी शान में तौहीन की हो
लेकिन शाह साहब
मैं एक अदना आम आदमी
अदना इंसान
आपके पेशे खिदमत में
शाह की शान में नज़्म अर्ज़ करता हूँ
नमस्कार
Monday, 12 June 2017
समझदारी की समझ
आज कल टीवी में
क्या रखा हुआ है नया
आज भी हम उन्ही बकझक
के सामानांतर में
अपने सवालों को
अपनी बातों को
भूल कुछ यूं रहे है
जिस तरह भूल गए हम
अपने राष्ट्रपिता को
शायद इस लिए हम उन्हें
" चतुर बनिया " से संबोधित करने के लिए
आतुर नज़र आते है
यह समझे बगैर
कि चतुराई और समझदारी में
समझ कर पाना काफी समझदारों का काम है
स्टेशन को बेचना
समझदारी नहीं
किसानो पर गोली चलवाना
समझदारी नहीं
सन्यासियों का हज़ार करोड़ का व्यापार करना
समझदारी नहीं
लेकिन क्या देश इतना
हो चूका है समझदार
कि चतुराई और समझदारी के बीच
अपनी समझ बना
समझदार बनने की
समझदार कोशिश करे ?
इस प्रश्न का उत्तर
कृप्या कोई समझदार ही दे
क्या रखा हुआ है नया
आज भी हम उन्ही बकझक
के सामानांतर में
अपने सवालों को
अपनी बातों को
भूल कुछ यूं रहे है
जिस तरह भूल गए हम
अपने राष्ट्रपिता को
शायद इस लिए हम उन्हें
" चतुर बनिया " से संबोधित करने के लिए
आतुर नज़र आते है
यह समझे बगैर
कि चतुराई और समझदारी में
समझ कर पाना काफी समझदारों का काम है
स्टेशन को बेचना
समझदारी नहीं
किसानो पर गोली चलवाना
समझदारी नहीं
सन्यासियों का हज़ार करोड़ का व्यापार करना
समझदारी नहीं
लेकिन क्या देश इतना
हो चूका है समझदार
कि चतुराई और समझदारी के बीच
अपनी समझ बना
समझदार बनने की
समझदार कोशिश करे ?
इस प्रश्न का उत्तर
कृप्या कोई समझदार ही दे
Sunday, 11 June 2017
फ़िज़ा की खबर
आज कई दिनों के बाद
फ़िज़ा ने कुछ अजीब सी
कुछ अलग सी
कुछ नई सी
अंगड़ाई ली
चली कुछ इस तरह
कि साथ मे अपने
कुछ खबरें भी लेकर आई
कुछ खबरें
ऐसी खबरें जो आज तक
छुपी हुई थी मुझसे
ज़माने से
कुछ लायी खुशी की खबरें
लेकिन उसके साथ काफी ग़म की भी
बातें मुझसे करने लगी
कुछ अलग ही अहसास
मेरे अंदर समावेशित होने लगी
उसने बताया मुझे बिहार के बारे में
जहां शिक्षा में बच्चे नही
65 % प्रशासन विफल हुआ
उसने बताया मुझे मध्य प्रदेश के बारे में
जहां पुलिस काफी भोली है
और उन्हें उपद्रवी और किसान में
फ़र्क़ नही आता समझ
उसने बताया मुझे राजस्थान के बारे में
जहां गोपालक को गोहत्यारा समझ
कर दी जाती है उसकी हत्या
उसनें बतया मुझे महाराष्ट्र के बारे में
जहां किसान अपने अनाज को
बेचने के बजाय
उसमे आग लगाने को मजबूर है
उसने बताया मुझे तमिल प्रदेश के बारे में
जहां किसान चूहों से
अपनी भूख मिटा रहे है
उसने बताया मुझे इश्क़ के प्रतीक
कृष्ण के राज्य के बारे में
जहा आज इश्क पर
लगा दिया गया है
हर तरह का पहरा
उसने बताया मुझे कश्मीर के बारे में
जहां जेहाद के नाम पर
युवक पत्थरबाज बन रहे है
और फौज युवकों को
अपने जीप से बांध बना रहे है
अपनी सुरक्षा की ढाल
ये सारी खबर सुनने के बाद
जब मैंने अपनी बात
चाही उसे सुननी
इस उम्मीद से
कि वो उड़ते उड़ते पहुंचे
सरकार के कानों में
तब तक वो फ़िज़ा
उड़ कर चली गयी
किसी और के पास
सुनाने अपनी बात
फ़िज़ा ने कुछ अजीब सी
कुछ अलग सी
कुछ नई सी
अंगड़ाई ली
चली कुछ इस तरह
कि साथ मे अपने
कुछ खबरें भी लेकर आई
कुछ खबरें
ऐसी खबरें जो आज तक
छुपी हुई थी मुझसे
ज़माने से
कुछ लायी खुशी की खबरें
लेकिन उसके साथ काफी ग़म की भी
बातें मुझसे करने लगी
कुछ अलग ही अहसास
मेरे अंदर समावेशित होने लगी
उसने बताया मुझे बिहार के बारे में
जहां शिक्षा में बच्चे नही
65 % प्रशासन विफल हुआ
उसने बताया मुझे मध्य प्रदेश के बारे में
जहां पुलिस काफी भोली है
और उन्हें उपद्रवी और किसान में
फ़र्क़ नही आता समझ
उसने बताया मुझे राजस्थान के बारे में
जहां गोपालक को गोहत्यारा समझ
कर दी जाती है उसकी हत्या
उसनें बतया मुझे महाराष्ट्र के बारे में
जहां किसान अपने अनाज को
बेचने के बजाय
उसमे आग लगाने को मजबूर है
उसने बताया मुझे तमिल प्रदेश के बारे में
जहां किसान चूहों से
अपनी भूख मिटा रहे है
उसने बताया मुझे इश्क़ के प्रतीक
कृष्ण के राज्य के बारे में
जहा आज इश्क पर
लगा दिया गया है
हर तरह का पहरा
उसने बताया मुझे कश्मीर के बारे में
जहां जेहाद के नाम पर
युवक पत्थरबाज बन रहे है
और फौज युवकों को
अपने जीप से बांध बना रहे है
अपनी सुरक्षा की ढाल
ये सारी खबर सुनने के बाद
जब मैंने अपनी बात
चाही उसे सुननी
इस उम्मीद से
कि वो उड़ते उड़ते पहुंचे
सरकार के कानों में
तब तक वो फ़िज़ा
उड़ कर चली गयी
किसी और के पास
सुनाने अपनी बात
Sunday, 2 April 2017
मैं नहीं पढता
मैं नहीं पढता अब
अपने नज्मों को
क्योंकि मुझे अब अपनी नज्मों से
होती है उलझन
वो सारी धुंधली हो चुकी यादें
वो सारे ज़ख्म
फिर ताज़ा होने लगते है
वो नज़्म जो मैंने लिखी थी तुम्हारे लिए
तुम्हारी जुल्फों के लिए
अमौर के लिए
लेकिन अब यूं लगता है
कि तुम मेरे नज्मों के
लायेक ही नहीं हो
तुम मेरे लायेक नहीं हो
तुमने मुझे जो तकलीफ दी
वो मैं सह सकता हूँ
लेकिन तुमने मुझसे ज्यादा
मेरी नज्मों को
रूहानी तकलीफ से नवाज़ा है
तुमने मेरी नज्मों का मौज़ू
मुझसे छीना है
इसलिए
अब मैं नहीं पढता अपनी नज्मों को
अपने नज्मों को
क्योंकि मुझे अब अपनी नज्मों से
होती है उलझन
वो सारी धुंधली हो चुकी यादें
वो सारे ज़ख्म
फिर ताज़ा होने लगते है
वो नज़्म जो मैंने लिखी थी तुम्हारे लिए
तुम्हारी जुल्फों के लिए
अमौर के लिए
लेकिन अब यूं लगता है
कि तुम मेरे नज्मों के
लायेक ही नहीं हो
तुम मेरे लायेक नहीं हो
तुमने मुझे जो तकलीफ दी
वो मैं सह सकता हूँ
लेकिन तुमने मुझसे ज्यादा
मेरी नज्मों को
रूहानी तकलीफ से नवाज़ा है
तुमने मेरी नज्मों का मौज़ू
मुझसे छीना है
इसलिए
अब मैं नहीं पढता अपनी नज्मों को
Tuesday, 21 March 2017
माफ़ करना भाई
माफ़ करना भाई
हमारे देश के राजनेताओं को
उन्हें फुर्सत नहीं
फुर्सत नहीं मंदिर ओ मस्जिद की तामीर से
फुर्सत नहीं दंगे भड़काने में
फुर्सत नहीं खून की
नदियाँ बहाने में
फुर्सत नहीं ज़मीन पर अधिकार करने से
अगर फुर्सत रही होती तो
यकीनन
यहाँ स्कूल में बच्चे पढने जाते
नहीं भरा जाता
सांप्रदायिक उन्माद उनके दिलों में
अगर फुर्सत होती
तो यहाँ अस्पताल तामीर होते
और किसी भी गाँव में
कोई मरता नहीं
अस्पताल के अभाव में
अगर फुर्सत होती
तो उन्हें भी पता चलता
कि इस मुल्क में
हिन्दू मुस्लिम दंगों के अलावा
गंगा जमुनी तहजीब भी बसती है
हमारे देश के राजनेताओं को
उन्हें फुर्सत नहीं
फुर्सत नहीं मंदिर ओ मस्जिद की तामीर से
फुर्सत नहीं दंगे भड़काने में
फुर्सत नहीं खून की
नदियाँ बहाने में
फुर्सत नहीं ज़मीन पर अधिकार करने से
अगर फुर्सत रही होती तो
यकीनन
यहाँ स्कूल में बच्चे पढने जाते
नहीं भरा जाता
सांप्रदायिक उन्माद उनके दिलों में
अगर फुर्सत होती
तो यहाँ अस्पताल तामीर होते
और किसी भी गाँव में
कोई मरता नहीं
अस्पताल के अभाव में
अगर फुर्सत होती
तो उन्हें भी पता चलता
कि इस मुल्क में
हिन्दू मुस्लिम दंगों के अलावा
गंगा जमुनी तहजीब भी बसती है
Saturday, 18 March 2017
मैं मौन हूँ
अब मैं मौन हूँ
शर्मिंदा हूँ
मौन हूँ अपने लोकतंत्र पर
शर्मिंदा हूँ अपने लोकतंत्र पर
मौन हूँ अपने देश की जनता पर
शर्मिंदा हूँ अपने देश की जनता पर
मौन हूँ देश की राजनीति पर
शर्मिंदा हूँ देश की राजनीति पर
मैं मौन हूँ शर्मिंदा हूँ
इसे आप मेरी देशभक्ति से ना जोड़े
क्योंकि मैं अपनी देशभक्ति पर भी
मौन हूँ शर्मिंदा हूँ
शर्मिंदा हूँ
मौन हूँ अपने लोकतंत्र पर
शर्मिंदा हूँ अपने लोकतंत्र पर
मौन हूँ अपने देश की जनता पर
शर्मिंदा हूँ अपने देश की जनता पर
मौन हूँ देश की राजनीति पर
शर्मिंदा हूँ देश की राजनीति पर
मैं मौन हूँ शर्मिंदा हूँ
इसे आप मेरी देशभक्ति से ना जोड़े
क्योंकि मैं अपनी देशभक्ति पर भी
मौन हूँ शर्मिंदा हूँ
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