आज कल टीवी में
क्या रखा हुआ है नया
आज भी हम उन्ही बकझक
के सामानांतर में
अपने सवालों को
अपनी बातों को
भूल कुछ यूं रहे है
जिस तरह भूल गए हम
अपने राष्ट्रपिता को
शायद इस लिए हम उन्हें
" चतुर बनिया " से संबोधित करने के लिए
आतुर नज़र आते है
यह समझे बगैर
कि चतुराई और समझदारी में
समझ कर पाना काफी समझदारों का काम है
स्टेशन को बेचना
समझदारी नहीं
किसानो पर गोली चलवाना
समझदारी नहीं
सन्यासियों का हज़ार करोड़ का व्यापार करना
समझदारी नहीं
लेकिन क्या देश इतना
हो चूका है समझदार
कि चतुराई और समझदारी के बीच
अपनी समझ बना
समझदार बनने की
समझदार कोशिश करे ?
इस प्रश्न का उत्तर
कृप्या कोई समझदार ही दे
क्या रखा हुआ है नया
आज भी हम उन्ही बकझक
के सामानांतर में
अपने सवालों को
अपनी बातों को
भूल कुछ यूं रहे है
जिस तरह भूल गए हम
अपने राष्ट्रपिता को
शायद इस लिए हम उन्हें
" चतुर बनिया " से संबोधित करने के लिए
आतुर नज़र आते है
यह समझे बगैर
कि चतुराई और समझदारी में
समझ कर पाना काफी समझदारों का काम है
स्टेशन को बेचना
समझदारी नहीं
किसानो पर गोली चलवाना
समझदारी नहीं
सन्यासियों का हज़ार करोड़ का व्यापार करना
समझदारी नहीं
लेकिन क्या देश इतना
हो चूका है समझदार
कि चतुराई और समझदारी के बीच
अपनी समझ बना
समझदार बनने की
समझदार कोशिश करे ?
इस प्रश्न का उत्तर
कृप्या कोई समझदार ही दे
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