Monday, 12 June 2017

समझदारी की समझ

आज कल टीवी में
क्या रखा हुआ है नया
आज भी हम उन्ही बकझक
के सामानांतर में
अपने सवालों को
अपनी बातों को
भूल कुछ यूं रहे है
जिस तरह भूल गए हम
अपने राष्ट्रपिता को
शायद इस लिए हम उन्हें
" चतुर बनिया " से संबोधित करने के लिए
आतुर नज़र आते है
यह समझे बगैर
कि चतुराई और समझदारी में
समझ कर पाना काफी समझदारों का काम है
स्टेशन को बेचना
समझदारी नहीं
किसानो पर गोली चलवाना
समझदारी नहीं
सन्यासियों का हज़ार करोड़ का व्यापार करना
समझदारी नहीं
लेकिन क्या देश इतना
हो चूका है समझदार
कि चतुराई और समझदारी के बीच
अपनी समझ बना
समझदार बनने की
समझदार कोशिश करे ?
इस प्रश्न का उत्तर
कृप्या कोई समझदार ही दे 

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