मैं नहीं पढता अब
अपने नज्मों को
क्योंकि मुझे अब अपनी नज्मों से
होती है उलझन
वो सारी धुंधली हो चुकी यादें
वो सारे ज़ख्म
फिर ताज़ा होने लगते है
वो नज़्म जो मैंने लिखी थी तुम्हारे लिए
तुम्हारी जुल्फों के लिए
अमौर के लिए
लेकिन अब यूं लगता है
कि तुम मेरे नज्मों के
लायेक ही नहीं हो
तुम मेरे लायेक नहीं हो
तुमने मुझे जो तकलीफ दी
वो मैं सह सकता हूँ
लेकिन तुमने मुझसे ज्यादा
मेरी नज्मों को
रूहानी तकलीफ से नवाज़ा है
तुमने मेरी नज्मों का मौज़ू
मुझसे छीना है
इसलिए
अब मैं नहीं पढता अपनी नज्मों को
अपने नज्मों को
क्योंकि मुझे अब अपनी नज्मों से
होती है उलझन
वो सारी धुंधली हो चुकी यादें
वो सारे ज़ख्म
फिर ताज़ा होने लगते है
वो नज़्म जो मैंने लिखी थी तुम्हारे लिए
तुम्हारी जुल्फों के लिए
अमौर के लिए
लेकिन अब यूं लगता है
कि तुम मेरे नज्मों के
लायेक ही नहीं हो
तुम मेरे लायेक नहीं हो
तुमने मुझे जो तकलीफ दी
वो मैं सह सकता हूँ
लेकिन तुमने मुझसे ज्यादा
मेरी नज्मों को
रूहानी तकलीफ से नवाज़ा है
तुमने मेरी नज्मों का मौज़ू
मुझसे छीना है
इसलिए
अब मैं नहीं पढता अपनी नज्मों को
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