जहाँ वफ़ा कुछ नहीं
दोस्ती कुछ नहीं है
जहाँ आदमी की हस्ती कुछ नहीं है
जहाँ जिन्दों से ज्यादा
मुर्दों के है बस्ती
जहाँ जिस्म है
सिक्कों के झंकार पर बिकती
जहाँ हव्वा की हमजिंस
है इन्साफ को तरसती
जहाँ हमसाए है
तलाश की मौकापरस्ती
मुझे नहीं चाहिए ऐसी दुनिया
तुम्हारी है तुम्ही सम्भालों ये दुनिया
जहाँ अमीरों के दौलत
के खातिर गरीब मरते
जहाँ हर पीठ पर
उनके साए है खंजर भोंकते
जहाँ राधा की बेटी इस्मत है
सरे आम लुटती
जहाँ रिश्तों की कशमकश में है
दिल सारे झुलसे
मुझे नहीं चाहिए ऐसी दुनिया
तुम्हारी है तुम्ही सम्भालों ये दुनिया
दोस्ती कुछ नहीं है
जहाँ आदमी की हस्ती कुछ नहीं है
जहाँ जिन्दों से ज्यादा
मुर्दों के है बस्ती
जहाँ जिस्म है
सिक्कों के झंकार पर बिकती
जहाँ हव्वा की हमजिंस
है इन्साफ को तरसती
जहाँ हमसाए है
तलाश की मौकापरस्ती
मुझे नहीं चाहिए ऐसी दुनिया
तुम्हारी है तुम्ही सम्भालों ये दुनिया
जहाँ अमीरों के दौलत
के खातिर गरीब मरते
जहाँ हर पीठ पर
उनके साए है खंजर भोंकते
जहाँ राधा की बेटी इस्मत है
सरे आम लुटती
जहाँ रिश्तों की कशमकश में है
दिल सारे झुलसे
मुझे नहीं चाहिए ऐसी दुनिया
तुम्हारी है तुम्ही सम्भालों ये दुनिया
जहाँ मज़हब की नाम पर
चलती गई तैगें
जहाँ इश्क पर है
हर किसी के नज़रे
जहाँ इश्क बदनाम है
हर मोड़ पर
जहाँ आदमी के इश्क को
तौला जाये चांदी पर
जहाँ सारे दिल तोडना चाहे
रिश्ते सरे दिल के
मुझे नहीं चाहिए ऐसी दुनिया
तुम्हारी है तुम्ही सम्भालों ये दुनिया
तुम्हारी है तुम्ही सम्भालों ये दुनिया
जहाँ नींद आती
खामोश सड़क पर
जहाँ आँख खुलती है
कब्रिस्तान पर
जहाँ बिकती औरत
नीलम होकर
जहाँ सभी जीना चाहे
दुसरे को मार कर
मुझे नहीं चाहिए ऐसी दुनिया
तुम्हारी है तुम्ही सम्भालों ये दुनिया
(तैगें - तलवार
इस्मत - इज्ज़त
हमजिंस - एक ही जिन्स के )
तुम्हारी है तुम्ही सम्भालों ये दुनिया
(तैगें - तलवार
इस्मत - इज्ज़त
हमजिंस - एक ही जिन्स के )
Badhiya amir-ishan
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