आज कई सालों बाद
खुद को समय दिया
अकेले गंगा किनारे बैठ
सूर्यास्त को देखा
सूर्यास्त देख कर
खुद को उसमे देखने की कोशिश की
मैं भी उसी तरह
जल्द ही डूबने वाला हूँ
डूब जाऊँगा लेकिन
उस सूरज की तरह अँधेरा कर के नहीं
उजाला करके जाऊँगा
क्योंकि मैं खुद सुकून से
दूसरी दुनिया में कदम रखूँगा
न सर पटक के
ना ही किसी जद्दोजहद के
आराम से खुद
अस्त हो जाऊँगा
अब मन शांत है
शांत गंगा की तरह
बस अब समुद्र में मिल जाऊँगा
और उस टकराहट के लिए
मैं अब तैयार हूँ
मैं अब अस्त होने के लिए
तैयार हूँ
मैं दूसरी दुनिया में जाने के लिए
तैयार हो
पता नहीं कौन सी कविता
मेरी आखरी कविता हो
इसलिए
अब सुकून से
दूसरी दुनिया में जाने के लिए
कविता लिखूंगा
कम से कम मेरे अस्त होने के बाद
लोग मुझे याद रखे
लेकिन मैं अब अस्त होने के लिए
तैयार हूँ
खुद को समय दिया
अकेले गंगा किनारे बैठ
सूर्यास्त को देखा
सूर्यास्त देख कर
खुद को उसमे देखने की कोशिश की
मैं भी उसी तरह
जल्द ही डूबने वाला हूँ
डूब जाऊँगा लेकिन
उस सूरज की तरह अँधेरा कर के नहीं
उजाला करके जाऊँगा
क्योंकि मैं खुद सुकून से
दूसरी दुनिया में कदम रखूँगा
न सर पटक के
ना ही किसी जद्दोजहद के
आराम से खुद
अस्त हो जाऊँगा
अब मन शांत है
शांत गंगा की तरह
बस अब समुद्र में मिल जाऊँगा
और उस टकराहट के लिए
मैं अब तैयार हूँ
मैं अब अस्त होने के लिए
तैयार हूँ
मैं दूसरी दुनिया में जाने के लिए
तैयार हो
पता नहीं कौन सी कविता
मेरी आखरी कविता हो
इसलिए
अब सुकून से
दूसरी दुनिया में जाने के लिए
कविता लिखूंगा
कम से कम मेरे अस्त होने के बाद
लोग मुझे याद रखे
लेकिन मैं अब अस्त होने के लिए
तैयार हूँ
No comments:
Post a Comment