Wednesday, 8 February 2017

अमौर तुम्हारे बिना

अमौर तुम्हारे बिना
जीना दुशवार है
तुम्हारे बिना
साँसे बोझिल लगती है
तुम्हारे बिना
सारे रिश्ते फ़ाज़िल लगते है
तुम्हारे बिना
सारे अलफ़ाज़ फीके लगते है
तुम्हारे बिना
अपना साया भी बेज़ार लगता है
तुम्हारे बिना
हमनवा कुछ नही
तुम्हारे बिना
पलछिन में रातें नहीं कटती
तुम्हारे बिना
छिट पुट सी बातें जलने लगती है
मेरे बिना मैं भी
रहने लगा हूँ अब
लेकिन अमौर
अब तुम्हारे बिना
मैं अधूरा हूँ

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