क्या आपने कभी भी
दरिया किनारे एकांत में बैठ
उस दरिया के मौजों से
गुफ्तगू करने की नाकाम कोशिश
की है
कभी कीजिये
अगर आप कोशिश करेंगे
तब आपको पता चलेगा
कि दरिया अपने अंदर
कितने अलग अलग
मिज़ाज़ों को समेटे हुए
कितने अलग मख़्लूकों ले साथ
जब किनारे से टकराता है
तो उसके समां में
किस तरह के
मुख़्तलिफ़ ख़्यालात उसमे रहते होंगे
पहली ख़ुशी की उसने
अपनी मंज़िल ए मुकाम एख्तीयार किया
लेकिन अगले लम्हे
उसे किनारे से टकरा कर
ख़त्म हो जाने का सबब
सारी ख्वाहिशों का खात्मा
कुछ यूं ही मैं भी
दरियानुमा ज़िन्दगी के
एख्यारात से रूबरू हूँ
जब मौत से टकराऊंगा
तब मेरा सफ़र तो
पूरा हो जाएगा
लेकिन मेरी ख्वाहिश
मेरी कहानी
माँ,मोहित,सूरज,अमित
सारे रिश्ते
ख़त्म हो जायेगे
कई ऐसे भी रिश्ते ख़त्म होंगे
जिसे मैं ख़त्म करना चाहता हूँ
लेकिन इतने जल्दी
माँ और दोस्तों को
छोड़ कर जाने का
मन नहीं
लेकिन क्या करे
हर दरिया को
किनारे से टकराना है
कोई पहले टकराता है
कुछ उसके बाद
शायद मेरे टकराहट का
मुकरर वक़्त आ गया है
दरिया किनारे एकांत में बैठ
उस दरिया के मौजों से
गुफ्तगू करने की नाकाम कोशिश
की है
कभी कीजिये
अगर आप कोशिश करेंगे
तब आपको पता चलेगा
कि दरिया अपने अंदर
कितने अलग अलग
मिज़ाज़ों को समेटे हुए
कितने अलग मख़्लूकों ले साथ
जब किनारे से टकराता है
तो उसके समां में
किस तरह के
मुख़्तलिफ़ ख़्यालात उसमे रहते होंगे
पहली ख़ुशी की उसने
अपनी मंज़िल ए मुकाम एख्तीयार किया
लेकिन अगले लम्हे
उसे किनारे से टकरा कर
ख़त्म हो जाने का सबब
सारी ख्वाहिशों का खात्मा
कुछ यूं ही मैं भी
दरियानुमा ज़िन्दगी के
एख्यारात से रूबरू हूँ
जब मौत से टकराऊंगा
तब मेरा सफ़र तो
पूरा हो जाएगा
लेकिन मेरी ख्वाहिश
मेरी कहानी
माँ,मोहित,सूरज,अमित
सारे रिश्ते
ख़त्म हो जायेगे
कई ऐसे भी रिश्ते ख़त्म होंगे
जिसे मैं ख़त्म करना चाहता हूँ
लेकिन इतने जल्दी
माँ और दोस्तों को
छोड़ कर जाने का
मन नहीं
लेकिन क्या करे
हर दरिया को
किनारे से टकराना है
कोई पहले टकराता है
कुछ उसके बाद
शायद मेरे टकराहट का
मुकरर वक़्त आ गया है
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