Wednesday, 15 February 2017

कल के नाम

कल की सुबह नयी होगी
कल के आफ़ताब में 
अलग ही चमक होगी
कल की शब यूं 
स्याह नहीं होगी
ज़ुल्म के सारे हुक्मरानों
तुम्हारे ये सरताज गिरेंगे
फर्श पर
कि कल की कलम भी
इंकलाबी होगी

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