Sunday, 19 February 2017

मेरी प्रिय कविता

मेरी सबसे प्रिय कविता
वो है जो मैंने
आज तक लिखी नहीं
वो गुम है
दिल के किसी अँधेरे में
किसी की परछाई तलाशती
शायद मेरी असलियत
पहचानने की कोशिश में है वो कविता
ये देखने के लिए
कि मैं उस कविता के
काबिल हूँ या नही
वो तलाशती है
मेरे भीतर छिपे सच को
और ये जानना चाहती है
कि कितना सच
कितना फरेब
मेरे अन्दर है
मेरी प्रिय कविता
मेरे अन्दर ही समावेशित हो कर
मेरे अन्दर ही
बसे रहना चाहती है
क्योंकि वो जानती है
कि जिस दिन वो कविता
मेरे अन्दर से निकल कर
बाहर कागज़ के एक
टुकड़े पर अपनी
छाप छोड़ेगी
सारी दुनिया की नज़र
उस पर पड़ेगी
वो उसे हथियाना चाहेगी
इसीलिए वो कविता
रहना चाहती है मेरे अन्दर
ताजिंदगी ताउम्र 

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