वाह भाई वाह
क्या कानून है तुम्हारा
क्या कानून है हमारा
जो लगाता है
12 बरस सिर्फ ये समझने में
कि कोई छात्र
कक्षा में था भी की नहीं
वाह भाई कानून
जब सारे लोग गवाही देते है
कुरआन और गीता की
कसमें भी खाते है
जब सारे सच भी
कमज़ोर पड़ जाते है
सिर्फ उसके धर्म के नाम पर
तब सच में होता है महसूस
कानून अँधा है
लेकिन ये कानून मेरा है
ये कानून तुम्हारा है
इस कानून की अंधे दांव पेच में
कहीं ना कहीं
इन्साफ कमज़ोर हो चूका है
ओ भाई कानून
जाग जा
( मोहम्मद रफ़ीक जो MA फाइनल का छात्र था । उसे 12 साल लगे ये साबित करने में कि वो बेगुनाह है । उसे दिल्ली ब्लास्ट में आरोपी बनाया गया था ।)
क्या कानून है तुम्हारा
क्या कानून है हमारा
जो लगाता है
12 बरस सिर्फ ये समझने में
कि कोई छात्र
कक्षा में था भी की नहीं
वाह भाई कानून
जब सारे लोग गवाही देते है
कुरआन और गीता की
कसमें भी खाते है
जब सारे सच भी
कमज़ोर पड़ जाते है
सिर्फ उसके धर्म के नाम पर
तब सच में होता है महसूस
कानून अँधा है
लेकिन ये कानून मेरा है
ये कानून तुम्हारा है
इस कानून की अंधे दांव पेच में
कहीं ना कहीं
इन्साफ कमज़ोर हो चूका है
ओ भाई कानून
जाग जा
( मोहम्मद रफ़ीक जो MA फाइनल का छात्र था । उसे 12 साल लगे ये साबित करने में कि वो बेगुनाह है । उसे दिल्ली ब्लास्ट में आरोपी बनाया गया था ।)
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