आज कई दिनों बाद
सोचा कि रब की
इबादत करूँ
मस्जिद गया तो लगा
कि यहाँ तो मेरा
रब है ही नहीं
मेरा रब तो कहीं और है
किसी और जगह
उस रब की तलाश में मैं निकला
जगह जगह दर बदर
सारे मकामों पर खोजा
लेकिन रब कहीं नहीं मिला
थक हार कर जब
घर वापस आया
तो तुम्हारे तस्वीर पर नज़र पड़ी
देख कर इतना सुकून हुआ
जितना खुदा को देख कर होता
मेरा रब तुम हो
अमौर
तुम्हारी बातें मेरे लिए
आयत है
तुमसे मिलना
इबादत है
तुम्हे देखना
सजदा है
मेरा रब तुम हो अमौर
इश्क का कोई मज़हब नहीं
इश्क अपने आप में
एक मज़हब है
मैं उसी मज़हब का हूँ
और तुम मेरे खुदा
मेरे अमौर
सोचा कि रब की
इबादत करूँ
मस्जिद गया तो लगा
कि यहाँ तो मेरा
रब है ही नहीं
मेरा रब तो कहीं और है
किसी और जगह
उस रब की तलाश में मैं निकला
जगह जगह दर बदर
सारे मकामों पर खोजा
लेकिन रब कहीं नहीं मिला
थक हार कर जब
घर वापस आया
तो तुम्हारे तस्वीर पर नज़र पड़ी
देख कर इतना सुकून हुआ
जितना खुदा को देख कर होता
मेरा रब तुम हो
अमौर
तुम्हारी बातें मेरे लिए
आयत है
तुमसे मिलना
इबादत है
तुम्हे देखना
सजदा है
मेरा रब तुम हो अमौर
इश्क का कोई मज़हब नहीं
इश्क अपने आप में
एक मज़हब है
मैं उसी मज़हब का हूँ
और तुम मेरे खुदा
मेरे अमौर
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