अमौर
क्या तुमने कभी
भोर की पहली किरण से पहले
रात को महसूस किया है
वो वक़्त सबसे डरावना
और अँधेरा
होता है
दुनिया के सारे अंधेरे
एक हो जाते है
और वो बेवक़ूफ़
ये सोचते है कि
अपनी सारी ताकत लगा कर
वो सूरज की किरणों को
रोक सकते है
लेकिन जब सूरज
अपनी मज़बूत बाहों को
फैला कर
किरणों को आज़ाद करता है
तो एक छोटी सी
किरण भी
उतने मज़बूत अँधेरे को
चीरते हुए बाहर निकलती है
कभी कभी हमें लगता है
कि शायद वो अँधेरा
कभी हटे ही ना
वो इसलिए
क्योंकि हम भूल जाते है
जब हम अपने अन्दर की
किरणों को बाहर निकालेंगे
तो सारे अँधेरे छट जायेंगे
बस हमें इंतज़ार करना पड़ता है
उस वक़्त का
और वो वक़्त हमेशा आता है
इसलिए कभी भी
अँधेरे से घबराना मत
क्योंकि
मैं हूँ ना ........
क्या तुमने कभी
भोर की पहली किरण से पहले
रात को महसूस किया है
वो वक़्त सबसे डरावना
और अँधेरा
होता है
दुनिया के सारे अंधेरे
एक हो जाते है
और वो बेवक़ूफ़
ये सोचते है कि
अपनी सारी ताकत लगा कर
वो सूरज की किरणों को
रोक सकते है
लेकिन जब सूरज
अपनी मज़बूत बाहों को
फैला कर
किरणों को आज़ाद करता है
तो एक छोटी सी
किरण भी
उतने मज़बूत अँधेरे को
चीरते हुए बाहर निकलती है
कभी कभी हमें लगता है
कि शायद वो अँधेरा
कभी हटे ही ना
वो इसलिए
क्योंकि हम भूल जाते है
जब हम अपने अन्दर की
किरणों को बाहर निकालेंगे
तो सारे अँधेरे छट जायेंगे
बस हमें इंतज़ार करना पड़ता है
उस वक़्त का
और वो वक़्त हमेशा आता है
इसलिए कभी भी
अँधेरे से घबराना मत
क्योंकि
मैं हूँ ना ........
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