Friday, 3 February 2017

अँधेरा

अमौर
क्या तुमने कभी
भोर की पहली किरण से पहले
रात को महसूस किया है
वो वक़्त सबसे डरावना
और अँधेरा
होता है
दुनिया के सारे अंधेरे
एक हो जाते है
और वो बेवक़ूफ़
ये सोचते है कि
अपनी सारी ताकत लगा कर
वो सूरज की किरणों को
रोक सकते है
लेकिन जब सूरज
अपनी मज़बूत बाहों को
फैला कर
किरणों को आज़ाद करता है
तो एक छोटी सी
किरण भी
उतने मज़बूत अँधेरे को
चीरते हुए बाहर निकलती है
कभी कभी हमें लगता है
कि शायद वो अँधेरा
कभी हटे ही ना
वो इसलिए
क्योंकि हम भूल जाते है
जब हम अपने अन्दर की
किरणों को बाहर निकालेंगे
तो सारे अँधेरे छट जायेंगे
बस हमें इंतज़ार करना पड़ता है
उस वक़्त का
और वो वक़्त हमेशा आता है
इसलिए कभी भी
अँधेरे से घबराना मत
क्योंकि
मैं हूँ ना ........

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