अमौर
तुम्हारे लिए ये ख़त है
पता नहीं आखरी है या नहीं
काफी ख्वाहिश थी मन में
कि तुम्हे देखूं
लेकिन अफ़सोस
कि मैं तुम्हे देख नहीं पाया
काफी ख्वाहिश थी
की तुम्हारे साथ एक तस्वीर हो
जिसका एक हिस्सा मेरे पास हो
एक तुम्हारे पास
जो इस बात को हमेशा
सारी काएनात को याद दिलाता रहे
कि इश्क में कोई शर्त नहीं होती
आप किसी से तब तक प्यार कीजिये
जब तक आप जिंदा है
सामने वाले ने कोई
कसम तो नहीं खायी है
कि वो भी आप से
प्यार करे
बस आप अपने लिए मोहब्बत करे
जैसा मैंने किया
अमौर
कल तुम चली जाओगी
दूर
पता नहीं फिर तुम्हे
कब देख पाऊँ
देख पाऊँ या नहीं
ये भी पता नहीं
अगर तुम कह दो खुदा कसम
मौत का भी मुंह मोड़ दे
लेकिन नहीं
अब मन नहीं
कौन फिर ज़िन्दगी जिए
कौन मेहनत करे
दिल लगाने को
दिल तोडवाने को
लेकिन हम फिर लौटेंगे
फिर उन्ही गलियों मे
अमौर के प्यार में
भूरी आँखों में
जुल्फों की सिलवटों में
दुबारा खो जाने को
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