Monday, 6 February 2017

अमौर के नाम

अमौर
तुम्हारे लिए ये ख़त है 
पता नहीं आखरी है या नहीं 
काफी ख्वाहिश थी मन में 
कि तुम्हे देखूं 
लेकिन अफ़सोस 
कि मैं तुम्हे देख नहीं पाया 
काफी ख्वाहिश थी 
की तुम्हारे साथ एक तस्वीर हो 
जिसका एक हिस्सा मेरे पास हो 
एक तुम्हारे पास 
जो इस बात को हमेशा 
सारी काएनात को याद दिलाता रहे 
कि इश्क में कोई शर्त नहीं होती 
आप किसी से तब तक प्यार कीजिये 
जब तक आप जिंदा है 
सामने वाले ने कोई 
कसम तो नहीं खायी है 
कि वो भी आप से 
प्यार करे 
बस आप अपने लिए मोहब्बत करे 
जैसा मैंने किया 
अमौर 
कल तुम चली जाओगी 
दूर 
पता नहीं फिर तुम्हे 
कब देख पाऊँ
देख पाऊँ या नहीं 
ये भी पता नहीं 

अगर तुम कह दो खुदा कसम 
मौत का भी मुंह मोड़ दे 
लेकिन नहीं 
अब मन नहीं 
कौन फिर ज़िन्दगी जिए 
कौन मेहनत करे 
दिल लगाने को 
दिल तोडवाने को 
लेकिन हम फिर लौटेंगे 
फिर उन्ही गलियों मे
अमौर के प्यार में 
भूरी आँखों में 
जुल्फों की सिलवटों में 
दुबारा खो जाने को  

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