Tuesday, 31 January 2017

मुझे याद है

मुझे याद है
जब मैं चार साल का था
और मेरे पापा
मुझे छोड़ हमेशा के लिए
चले गए थे
मुझे कुछ समझ नहीं आता था
कि अचानक एक
हँसता, जिंदादिल इंसान
चुपचाप लेटा हुआ क्यों है

मुझे याद है
पापा हमेशा कहते थे
"मेरे जिगर का टुकड़ा"
यही बात और सिर्फ यही याद
आज तक
मेरे कानों में गूंजती है

मुझे याद है
जब पापा को
ले जाया जा रहा था दफ़नाने
तब कोई
मेरी मुट्ठी में मिट्टी भर
फेंकवा रहा था
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था
कि क्यों सब पापा को
मिट्टी से मार रहे है

मुझे याद है
जब भी अम्मी से पूछता
पापा कहाँ गए है ?
तो अम्मी कहती
पापा बहुत दूर गए है
जब तुम बड़े हो जाओगे
अच्छे पढ़ लिख कर
काबिल बन जाओगे
तब पापा वापस आयेंगे

मुझे याद है
अम्मी कहती थी
पापा हर रात तुम्हारे पास आते है
जब तुम सोते हो
और मैं जब सो जाता था
तो अम्मी चुपके से
मेरे तकिये के नीचे
टॉफ़ी रख देती थी
और सुबह जब मैं उसे देखता
तो अम्मी कहती
पापा रात में रख के गए है
मुझे याद है 

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