Saturday, 28 January 2017

एक ख़त - मोहित के नाम

भाई, कैसे हो
बहुत याद आती है
तुम्हारी
ख़ास कर
जब मन बहुत ज़्यादा खुश
या दुखी होता है
क्योंकि तुम नहीं होते हो
तो लगता है
किससे बातें करूँ
क्योंकि मेरे हमराज़
तो तुम हो
तुमने मेरा साथ तब दिया
जब सारी दुनिया ने
मुझसे मुँह मोड़ा था
उस वक़्त तुमने
ना केवल मुझे संभाला
बल्कि मुझे गले लगाया
भले नौकरी मेरी लगी
लेकिन उसके इंटरव्यू के लिए
तुम मुझसे पहले जगते हो
मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा
खुश होते हो
बहुत खुशकिस्मत हूँ मैं
जो तुम्हारे जैसा
दोस्त मिला
बस अब जल्दी वापस आ जाओ
क्योंकि अब तुम्हारे बिना
मन नहीं लगता
मोहित
मेरे भाई, मेरे दोस्त
अगर इन रिश्तों के ऊपर
भी कोई रिश्ता है
तो वो मेरा तुम्हारे साथ है
तुमसे मेरा क्या नाता है
ये शायद ही कोई समझे
एक बात मैं कभी नहीं
कह पाया
शुक्रिया भाई
अगर तुम ना होते
तो शायद आज भी
कहीं पड़ा होता
ना जाने किस हालात में

मोहित
जल्दी वापस आओ

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