अमौर ये मेरी अंतिम कविता
ऐसा नहीं की मैं
तुमसे बात करना
छोड़ रहा हूँ
लेकिन आज मुझे महसूस हुआ
की मैंने अपना प्यार
खोया नहीं है
क्योंकि मैंने कभी उसे पाया ही नहीं
लेकिन अब मुझसे
और लिखा नहीं जाएगा
क्योंकि
मेरे ज़िन्दगी में
वैसे भी कुछ था नहीं
लेकिन तुम जब आई
तो ज़िन्दगी पूरी हुई थी
और अब फिर ज़िन्दगी
बंजर और उजाड़ हो चुकी है
इस लिए मैं अब नहीं लिखूंगा
लेकिन ये उम्मीद है
कि वो वक़्त दुबारा आएगा
जब मैं फिर से
तुम्हारी भूरी आँखों में खो जाऊँगा
और दुबारा लिखना
शुरू करूंगा
ऐसा नहीं की मैं
तुमसे बात करना
छोड़ रहा हूँ
लेकिन आज मुझे महसूस हुआ
की मैंने अपना प्यार
खोया नहीं है
क्योंकि मैंने कभी उसे पाया ही नहीं
लेकिन अब मुझसे
और लिखा नहीं जाएगा
क्योंकि
मेरे ज़िन्दगी में
वैसे भी कुछ था नहीं
लेकिन तुम जब आई
तो ज़िन्दगी पूरी हुई थी
और अब फिर ज़िन्दगी
बंजर और उजाड़ हो चुकी है
इस लिए मैं अब नहीं लिखूंगा
लेकिन ये उम्मीद है
कि वो वक़्त दुबारा आएगा
जब मैं फिर से
तुम्हारी भूरी आँखों में खो जाऊँगा
और दुबारा लिखना
शुरू करूंगा
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