यादें
आज अचानक गलती से
याद आई बचपन की
सभी को याद आती है
अपने गुज़रे हुए कल की
लेकिन पता नहीं क्यों
मेरा दिल और दिमाग
नहीं याद करना चाहता
अपने बीते लम्हे को
नहीं याद करना चाहता
पिता का गुज़र जाना
नहीं याद करना चाहता
बाजी का बिछड़ जाना
नहीं याद करना चाहता
ग़ुरबत का वो दौर
मेरा ज़ेहन उन यादों को खंगालना चाहता है
जो यादें अब धुंधली
हो चुकी है
हो सकता है उन यादों में
पापा के साथ बिठाये गए
कुछ हसीन पल हो
हो सकता है
बाजी के साथ हंसी ठिठोली हो
हो सकता है उन यादों में
मेरी मां की आखरी हंसी छुपी हो |
आज अचानक गलती से
याद आई बचपन की
सभी को याद आती है
अपने गुज़रे हुए कल की
लेकिन पता नहीं क्यों
मेरा दिल और दिमाग
नहीं याद करना चाहता
अपने बीते लम्हे को
नहीं याद करना चाहता
पिता का गुज़र जाना
नहीं याद करना चाहता
बाजी का बिछड़ जाना
नहीं याद करना चाहता
ग़ुरबत का वो दौर
मेरा ज़ेहन उन यादों को खंगालना चाहता है
जो यादें अब धुंधली
हो चुकी है
हो सकता है उन यादों में
पापा के साथ बिठाये गए
कुछ हसीन पल हो
हो सकता है
बाजी के साथ हंसी ठिठोली हो
हो सकता है उन यादों में
मेरी मां की आखरी हंसी छुपी हो |
Beautiful.keep waiting like this.ishan bhaia
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteहम ज्यादा बड़े तो नहीं हुए हैं. आपसे तो छोटे ही हैं, लेकिन बचपन की यादें तो बचपन की यादें होती हैं.
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