विचित्र लोग
आज मैं अपने दोस्त के साथ
टहल रहा था
और आगे चल कर उसकी नज़र
एक व्यक्ति पर थमी
एक व्यक्ति जो इस ठण्ड में भी
सिर्फ एक कच्छा पहने
नंगे बदन
गटर में घुस
उसकी सफाई कर रहा था
मेरे मित्र ने नाक भौं सिकोड़
उसे घृणित दृष्टि से देखा
और कहा
"कितने गंदे होते है ये लोग"
मैं उस व्यक्ति को देखने लगा
और सोचा गंदे नहीं
विचित्र होते है ये लोग
एक तो दुनिया की गन्दगी
को साफ़ करते है
ऊपर से समाज की गालियां
भी सुनते है
अगर ये काम करना बंद
कर दे
तो सोचिये क्या होगा ?
हमारे प्रधानमंत्री जब
झाड़ू लगते है तब
विश्व भर ने ढिंढोरा पिटते है
लेकिन जब कोई मज़दूर
सिर पर मैला उठता है
गटर साफ़ करता है
तो हम उन्हें समाज से
क्यों कर देते है बहिष्कृत
तब अचानक हमें
उनकी जाति क्यों याद आती है
और हम अपने को
अचानक ही
सर्वशेष्ठ जाति का
समझने लग जाते है
किंतु वो नहीं जानते
कि सबसे नीच इंसान वही है
जो दूसरे इंसान को
नीच कहे ।
आज मैं अपने दोस्त के साथ
टहल रहा था
और आगे चल कर उसकी नज़र
एक व्यक्ति पर थमी
एक व्यक्ति जो इस ठण्ड में भी
सिर्फ एक कच्छा पहने
नंगे बदन
गटर में घुस
उसकी सफाई कर रहा था
मेरे मित्र ने नाक भौं सिकोड़
उसे घृणित दृष्टि से देखा
और कहा
"कितने गंदे होते है ये लोग"
मैं उस व्यक्ति को देखने लगा
और सोचा गंदे नहीं
विचित्र होते है ये लोग
एक तो दुनिया की गन्दगी
को साफ़ करते है
ऊपर से समाज की गालियां
भी सुनते है
अगर ये काम करना बंद
कर दे
तो सोचिये क्या होगा ?
हमारे प्रधानमंत्री जब
झाड़ू लगते है तब
विश्व भर ने ढिंढोरा पिटते है
लेकिन जब कोई मज़दूर
सिर पर मैला उठता है
गटर साफ़ करता है
तो हम उन्हें समाज से
क्यों कर देते है बहिष्कृत
तब अचानक हमें
उनकी जाति क्यों याद आती है
और हम अपने को
अचानक ही
सर्वशेष्ठ जाति का
समझने लग जाते है
किंतु वो नहीं जानते
कि सबसे नीच इंसान वही है
जो दूसरे इंसान को
नीच कहे ।
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