Saturday, 31 December 2016

                                                         नए साल का उत्सव 


नए साल में ऐसा क्या 
नया है 
किस नए पन का उत्सव 
सारी दुनिया मनाती है 
मजदूर तो उस दिन  भी 
अपनी मजदूरी के लिए 
करेंगे जद्दो-जहद 
तब भी शायद रात में 
अपने परिवार का पेट ना भर पाए 
किसान तो उस दिन भी 
साहोकार के आतंक से 
आतंकित होकर 
आत्महत्या करेंगे, फिर भी 
उन्हें मुक्ति नसीब नहीं होगी 
संघर्षशील तो उस दिन भी 
अपने अधिकारों और हुकूक के प्रति 
संघर्ष करेंगे 
फिर भी अन्याय में 
बदलाव ना ला पाएंगे 
औरतें तो उस दिन भी 
मर्दों की गालियाँ सुनेगी 
अपने घर में झाड़ू और पोछा लगाएंगी 
फिर भी किसी किसी से 
स्नेह की उम्मीद नहीं होगी 
इन सारे लोगों के लिए 
नया साल का दिन भी 
बाकी दिन जैसा है 
लेकिन पता नहीं 
किस नए पन का उत्सव 
सारी दुनिया मनाती है 

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