Tuesday, 27 December 2016

                                                                     कमज़ोरी का मारा 


कभी सोचता था पढ़ लिख कर 
क्या काम करूंगा 
नौ से पांच नौकरी 
या आजीवन घर पे आराम करूंगा 
माँ ने इंजिनियर बनो 
पर साला मैथ्स कमज़ोर निकला 
टीचर ने कहा डॉक्टर बनो 
पर साला बायोलॉजी कमज़ोर निकला 
रिश्तेदारों ने कहा पुलिस बनो 
पर साला जिगर कमज़ोर निकला 
दोस्तों ने कहा वकील बनो पर 
मैं तो साला ज़बान का भी कमज़ोर निकला 
फिर सोचा मैंने क्यों ना लेखक बन जाऊं 
और तब कलम तो मज़बूत निकला 
पर क्या करूँ मैं तो अभागा हूँ ना 
तब सारी दुनिया का दिमाग ही कमज़ोर निकला 

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