ख्वाहिश का टुकड़ा
आज मन ही मन ऐसा महसूस हो रहा है
जैसे मेरी आत्मा
अन्दर से खोखली हो चुकी है
एक ख्वाहिश थी मन में, वो
टूट चुकी है, दब चुकी है
लेकिन उस ख्वाहिश के ख़त्म
हो जाने के बावजूद
शायद उस ख्वाहिश का छोटा सा हिस्सा
मेरे अन्दर अब भी मौजूद है
लेकिन मेरे अन्दर
अब इतनी हिम्मत बाकि नहीं
कि उस ख्वाहिश के हिस्से को
और बिखरता हुआ देख सकूं
अब तो बस एक ही दुआ है
कि ज़िन्दगी भर उस ख्वाहिश का हिस्सा
मेरे अन्दर रहे
और उस हिस्से को अपने मन में
सजों कर सारी ज़िन्दगी बसर कर लूं
इस उम्मीद में कि वो ख्वाहिश
फिर से जिंदा हो उठे
आज मन ही मन ऐसा महसूस हो रहा है
जैसे मेरी आत्मा
अन्दर से खोखली हो चुकी है
एक ख्वाहिश थी मन में, वो
टूट चुकी है, दब चुकी है
लेकिन उस ख्वाहिश के ख़त्म
हो जाने के बावजूद
शायद उस ख्वाहिश का छोटा सा हिस्सा
मेरे अन्दर अब भी मौजूद है
लेकिन मेरे अन्दर
अब इतनी हिम्मत बाकि नहीं
कि उस ख्वाहिश के हिस्से को
और बिखरता हुआ देख सकूं
अब तो बस एक ही दुआ है
कि ज़िन्दगी भर उस ख्वाहिश का हिस्सा
मेरे अन्दर रहे
और उस हिस्से को अपने मन में
सजों कर सारी ज़िन्दगी बसर कर लूं
इस उम्मीद में कि वो ख्वाहिश
फिर से जिंदा हो उठे
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