प्रेरणा स्रोत -२
जैसा मैंने पहले भी कहा था
और मुझे उम्मीद भी थी
कि मैं जब भी राह भटकूँगा
तुम आओगी मेरे पास
शायद तुम उस रूप में ना आओ
जैसा मैं तुम्हे देखता आया हूँ
तुम रौशनी के रूप में आओ
और मेरी ज़िन्दगी में फिर से
रौशन हो जाओ
क्योंकि बस अब और
अँधेरा सहन नहीं होता
क्योंकि उस अँधेरे में
मेरी आँखे तो सब कुछ देख सकती है
पर मेरी आत्मा नहीं .....
जैसा मैंने पहले भी कहा था
और मुझे उम्मीद भी थी
कि मैं जब भी राह भटकूँगा
तुम आओगी मेरे पास
शायद तुम उस रूप में ना आओ
जैसा मैं तुम्हे देखता आया हूँ
तुम रौशनी के रूप में आओ
और मेरी ज़िन्दगी में फिर से
रौशन हो जाओ
क्योंकि बस अब और
अँधेरा सहन नहीं होता
क्योंकि उस अँधेरे में
मेरी आँखे तो सब कुछ देख सकती है
पर मेरी आत्मा नहीं .....
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