आज नींद आ रही है
सुकून भरी
बचपन में जैसी नींद आती थी
वैसी नींद
जिसमे मासूम सपने देखे
जिनका कोई मतलब तो नहीं
लेकिन वो सपने भी
ऐसे होते थे जिन्हें
जीने का मन करता था
अब जो सपने आते है
उनमे भी फरेब भरा है
क्योंकि दुनिया ने इतना फरेब किया है
कि अब सपने भी फरेब के आते है
लेकिन आज नींद आ रही है
जैसी आती थी बचपन में
और इस उम्मीद में
आँखें मूँद रहा हूँ
कि शायद सपने भी सच्चे आये
बचपन जैसे
सुकून भरी
बचपन में जैसी नींद आती थी
वैसी नींद
जिसमे मासूम सपने देखे
जिनका कोई मतलब तो नहीं
लेकिन वो सपने भी
ऐसे होते थे जिन्हें
जीने का मन करता था
अब जो सपने आते है
उनमे भी फरेब भरा है
क्योंकि दुनिया ने इतना फरेब किया है
कि अब सपने भी फरेब के आते है
लेकिन आज नींद आ रही है
जैसी आती थी बचपन में
और इस उम्मीद में
आँखें मूँद रहा हूँ
कि शायद सपने भी सच्चे आये
बचपन जैसे
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