आमिर अब्बास की पहली कविता
'पापा'
पापा मैं कभी भूल से भी आपको याद नहीं करता।
लेकिन जब मस्जिद की आज़ान देती है सुनाई,
तो आपकी याद अपने आप आ जाती है।
पापा मैं कभी आपको याद नहीं करता।
लेकिन जब कूकती है कोयल,
महकता है गुलाब,
खिलखिलाता है गुलमोहर
तो बहती हवा के साथ
आपकी याद अपने आप चली आती है।
पापा मैं कभी भूल से भी आपको याद नहीं करता।
पर जब काम से थक कर
अम्मी चिल्लाती हैं मुझ पर,
तब ढूंढता हूँ आपको
कि आप मुझे अपनी गोद में छिपा लें
तब पापा आपकी याद अपने आप चली आती है।
पापा मैं कभी भूल से भी आपको याद नहीं करता
लेकिन आपकी याद अपने आप चली आती है मेरे पास।
Luv n wishes Amir.ishN bhaia
ReplyDeleteये कविता जब पहली बार पढ़ी थी तो दिल को छू गयी थी... बहुत बढ़िया. मेरे लिए आपकी सारी कविताओं में से सबसे अच्छी ये वाली है.
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