हम किसके लिए जीते है ?
यह सवाल अक्सर
कई लोगों के अंदर कौंधता है
और आपका मन जवाब देता है
"इश्क के लिए, प्यार के लिए"
वगैरा वगैरा
लेकिन क्या आपने कभी
ऐसे इंसान से मुलाकात की है
जिसका मन ये जवाब देता था
"समाज के लिए "
आप सभी को उससे मुलाकात करनी चाहिए
उसका नाम है
भगत सिंह
एक नौजवान
जो एक अमीर घर से था
जो सभी ऐशो आराम से
अपनी ज़िन्दगी गुज़ार सकता था
लेकिन उसके मन में ऐसा क्या आया
जिससे वो बिस्तर का आराम छोड़
काल कोठरी को गले लगाया
मजदूरों, हाशिये पर खड़े लोगों के लिए
अपना परिवार अपनी माँ अपना जीवन
सब त्याग दिया
उसका कोई धर्म नहीं
कोई जाति नहीं
थी तो सिर्फ विचार
उनका मकसद समाजवादी आजादी थी
लेकिन आज उस इंसान को हमने
सिर्फ तस्वीर के ही लायक समझा
उनके टी शर्ट छपवाए
उनके नाम की सड़कें बनवाई
उनके पुतले तक लगा दिए
लेकिन आज भी
धर्म, जाति के नाम पर
घोंट रहे है एक दूसरे का गला
आज भी हम सवाल करना
आवाज़ बुलंद करना नहीं सीखें
आज भी हम नेताओं के
अंध भक्त होते है
लेकिन फिर भी हम कहते है
"मैं फैन भगत सिंह का "
लानत है हम पर |
बढ़िया :)
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