Wednesday, 18 January 2017

                                                               मासूम है वो कातिल


वो तो काफी मासूम है
इतने मासूम कि उन्हें
पता ही नहीं की अगर किसी को
हॉकी स्टिक से बेतहाशा पीटा जाए
और उसकी मौत हो जाए
तो वो गुनाह  है

वो इतने मासूम है
कि उन्हें एक 21-22 साल
के नौजवान की दाढ़ी और टोपी
देख भड़क जाए
और ना सिर्फ उसे बल्कि
पूरे हिन्दुस्तान के उन लोगों की
हत्या कर दें जो शान्ति से
अपने धर्म का पालन कर रहे है
लेकिन फिर भी वो
गुनाहगार नहीं है

वो तो इतने मासूम है
कि एक बेवक़ूफ़ के भड़काऊ भाषण से
इतना उत्तेजित हो जाते है
कि आप एक परिवार उजाड़ देते है
उस परिवार का भविष्य अन्धकार में डाल देते है
लेकिन फिर भी वो मासूम है

और अंत में मैं एक चीज़
और साफ़ साफ़ कह दूं
क्योंकि मैं नहीं चाहता कि
मैं भी ऐसे ही किसी मासूम के हाथों मारा जाऊं
कि ये शब्द मेरे नहीं है
ये सारी चीज़े हमारे
"महान" राष्ट्र के "महान" न्यायलय का है
इसी लिए
हे मासूमों आप से अपील है
कृप्या अपनी मासूमियत त्याग दे |



(कुछ दिन पहले पुणे के एक नौजवान लड़के मोहसिन शेख़ की हत्या के जुर्म में सम्मिलित ३ लोगों के बेल की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने ये कहा था |)

1 comment:

  1. दुनिया जिस दिन मासूम को मासूम समझ लेगी उस दिन शायद देश में थोडा सा बदलाव आ जाये.

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